रमेश म्हात्रे
कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका (KDMC) द्वारा संचालित डोम्बिवली के शास्त्रीनगर अस्पताल के डॉक्टरों के साथ मारपीट करने के आरोपी शिवसेना (शिंदे गुट) नगरसेवक रमेश म्हात्रे की बॉम्बे हाईकोर्ट के एक कमेंट ने मुश्किल बढ़ा दी है। रमेश म्हात्रे को जमानत देने के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट में अपील की गई थी। उनके वकील सना खान ने अनुरोध किया कि रमेश म्हात्रे को किडनी सहित अन्य बीमारियां हैं। इसलिए कुछ शर्तों के साथ उन्हें जमानत दी जाए। इस पर कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रविंद्र घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अंखड ने रमेश म्हात्रे के वकीलों को फटकार लगाते हुए कहा- नगरसेवक रमेश म्हात्रे को कुछ और दिन हिरासत में रहने दें। क्या आपने डॉक्टरों के साथ मारपीट का वीडियो देखा है? उसमें मारपीट करते समय वह 25 साल के युवक जैसे नजर आ रहे हैं। वह इतनी ताकत दिखा रहे हैं कि महिलाओं के साथ भी मारपीट कर रहे हैं।
इसके अलावा हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि रमेश म्हात्रे को अस्पताल में भर्ती किए जाने के दिनों का सीसीटीवी फुटेज शास्त्रीनगर महानगरपालिका अस्पताल सुरक्षित रखे। यदि अदालत को उसे देखने की जरूरत महसूस होती है, तो यह फुटेज पेश किया जाए, यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी।
पीठ ने यह सवाल भी उठाया- यदि आरोपी नगरसेवक रमेश म्हात्रे सार्वजनिक जीवन में हैं, तो उनका कर्तव्य लोगों की रक्षा करना है या उनके साथ मारपीट करना।
पीठ ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा- आरोपी रमेश म्हात्रे को सीधे मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश करने के बजाय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश करने वाले पुलिस अधिकारी कौन हैं। उन्हें ऐसी वीआईपी सुविधा क्यों दी गई? हम देश में ऐसी स्थिति नहीं चाहते, जहां पुलिस नागरिकों, विशेष रूप से कानून का पालन करने वाले नागरिकों की रक्षा करने के बजाय आरोपियों को वीआईपी सुविधा दे।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने पीड़ित डॉक्टरों की ओर से इस मामले में हस्तक्षेप आवेदन दाखिल किया। अदालत को बताया गया कि केंद्र सरकार के परिपत्र के अनुसार, किसी भी स्वास्थ्यकर्मी के साथ मारपीट होने पर छह घंटे के भीतर संस्थागत FIR दर्ज किया जाना आवश्यक है। हालांकि, KDMC ने इस संबंध में कोई कार्रवाई नहीं की। इसके बाद अगले दिन पीड़ितों की शिकायत के आधार पर FIR दर्ज की गई।
हाईकोर्ट ने इस मामले को भी गंभीरता से लिया। अदालत ने KDMC को मामले में प्रतिवादी बनाने का निर्देश देते हुए उसे नोटिस जारी किया है।
